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क्या हैँ हैदराबाद गैज़ेट? और मराठा आरक्षण

अवेस सिद्दीकी✒️
हैदराबाद गज़ेट और मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र में एक बार फिर सुर्खियों में है। 2 सितंबर 2025 को राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए हैदराबाद गज़ेट 1918 को वैध प्रमाण मान लिया। इसके आधार पर मराठवाड़ा क्षेत्र के मराठाओं को कुंबी दर्जा देकर OBC आरक्षण का लाभ मिलेगा। यह फैसला मराठा समाज के वर्षों से चल रहे संघर्ष की बड़ी जीत माना जा रहा है।

अब पात्र मराठा परिवारों को सरकारी नौकरी, शिक्षा, छात्रवृत्ति और कल्याणकारी योजनाओं में अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह आरक्षण पूरे समाज को नहीं मिलेगा, बल्कि केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जिनके पास हैदराबाद गज़ेट में कुंबी दर्जा साबित करने वाले दस्तावेज़ होंगे।

इसके लिए सरकार ने ग्राम स्तरीय समितियाँ गठित की हैं, जिनमें राजस्व, कृषि और पंचायत अधिकारी शामिल होंगे। आवेदन करने वालों को निम्नलिखित प्रमाण देना होगा:

  • हैदराबाद गज़ेट का पुराना रिकॉर्ड,
  • 1967 से पहले का निवास हलफनामा,
  • परिवार के सदस्य का कुंबी प्रमाणपत्र।


इस घोषणा के बाद आंदोलनकारी नेता मनोज जरांगे पाटिल ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। हजारों मराठा परिवारों ने इस निर्णय को न्याय और संघर्ष की जीत बताया।

हालांकि, इस फैसले पर कई OBC संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में मराठा परिवार OBC वर्ग में शामिल हो गए तो मौजूदा OBC समाज का आरक्षण प्रभावित हो सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि OBC का हक सुरक्षित रहेगा और केवल वास्तविक पात्रों को ही प्रमाणपत्र मिलेगा।

यह निर्णय एक संतुलित कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे योग्य मराठाओं को लाभ मिलेगा और साथ ही OBC समाज के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस नीति को कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता से लागू करती है।

हैदराबाद गज़ेट पर आधारित यह फैसला महाराष्ट्र की आरक्षण राजनीति का नया अध्याय साबित हो सकता है।

 

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