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शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दतिया में फार्माकोलॉजी विभाग के अंर्तगत सीएमई का हुआ सफल आयोजन।

ByTcs24News

Jun 8, 2024
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दतिया में फार्माकोलॉजी विभाग के अंर्तगत सीएमई का हुआ सफल आयोजन।

फार्माकोलॉजी विभाग की सीएमई के माध्यम से दतिया मेडिकल कॉलेज के छात्रों को राष्ट्र स्तरीय फैकल्टी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है: डीन डा. दीपक एस मरावी।

देश एवं प्रदेश के ख्याति प्राप्त चिकित्सक हुए शामिल।

गुलशन परुथी | दतिया | शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दतिया में डीन एवं सीएमई के चीफ़ पेट्रोन डा.दीपक एस मरावी के निर्देंशन में फार्मोकोलॉजी विभाग के अंतर्गत विभागाध्यक्ष एवं सीएमई के ऑर्गनाइजिंग चेयर पर्सन डॉ. एस के बौद्ध द्वारा “एथिक्स इंक्लूडिंग गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस इन रिसर्च एंड गुड बायो मेडिकल रिसर्च गाइडलाइंस” विषय पर सीएमई का अयोजन दिनांक 7 जून को किया गया! कार्यक्रम के आरंभ में मेडिकल डीन डॉ. दीपक एस मरावी ने चिकित्सकों एवं पीजी छात्रों का प्रोत्साहन करते हुए इस कार्यक्रम की उपयोगिता के बारे में बताया। सीएमई के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ बी पी काले ने बताया कि सीएमई में देश एवं प्रदेश के ख्याति प्राप्त चिकित्सकों ने भाग लेकर अपना मार्गदर्शन मेडिकल छात्रों को प्रदान किया है। मेडिकल कॉलेज के लेक्चर थियेटर में आयोजित सीएमई में एम्स भोपाल के डा. सूर्या बाली, गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल की डा.हेमलता वर्मा, मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डा.आर के निगम, आर डी गार्डी मेडिकल कॉलेज उज्जैन के डा.एस पी धनेरिया, ग्वालियर के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डा.अजय गौर, जीएमसी दतिया के डा. एस के बौद्ध, डा.राजेश गुप्ता, डा. अनिल मंगेशकर आदि ने संबधित विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया !

सीएमई की थीम निम्नलिखित रही!
1.गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस इन रिसर्च
2.बायो मेडिकल एंड हेल्थ रिसर्च गाइडलाइंस, आईसीएमआर 2017
3.क्लिनिकल ट्रायल रूल ऑफ न्यू ड्रग 2019

फार्माकोलॉजी के विभागाध्यक्ष डा. एस के बौद्ध द्वारा जानकारी देते हुए बताया कि सीएमई का उद्देश्य चिकित्सकों को रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल्स के बारे में सही और अत्याधुनिक जानकारी देना है। जीएमसी दतिया का फार्मोकोलॉजी विभाग शुरुआत से ही रिसर्च को बढ़ावा देने में प्रयासरत है। क्लिनिकल रिसर्च और ट्रायल के माध्यम से नई दवाओं का खोज होना संभव होता है और बड़ी से बड़ी बीमारियों के लिए भी आसान और कम साइड इफेक्ट वाले उपचारों को खोज पाना मुमकिन हो सकता है। उक्त सीएमई में मेडिकल दतिया के चिकित्सा शिक्षक, पीजी छात्र एवं विभागीय स्टॉफ बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए।

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