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मध्य प्रदेश इंदौर सहित कई जिलों के निजी बैंकों और फाइनेंस कंपनियों के टास्क फोर्स ग्रुप के साथ क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस की कार्यशाला।

ByTcs24 News

Aug 8, 2024
मध्य प्रदेश इंदौर सहित कई जिलों के निजी बैंकों और फाइनेंस कंपनियों के टास्क फोर्स ग्रुप के साथ क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस की कार्यशाला।क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस ने इंदौर सहित विभिन्न जिलों के निजी बैंकों और वित्त कंपनियों के टास्क फोर्स ग्रुप के साथ एक कार्यशाला आयोजित की।

गुलशन परुथी – ग्वालियर

  • ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायतों में अधिक से अधिक राशि आवेदकों को रिफंड कराने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी उक्त बैठक।
  • साइबर फ्रॉड के मामलो में जल्द जानकारी देने वाले बैंक कर्मचारियों को हर महीने दिया जाएगा सर्टिफिकेट।

इंदौर पुलिस आयुक्त(नगरीय) श्री राकेश गुप्ता एवं अतिरिक्त पुलिस आयुक्त(अपराध/मुख्यालय) श्री मनोज श्रीवास्तव के निर्देशन में ऑनलाइन फ्रॉड की रोकथाम एवं आवेदकों के साथ हुए ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायतों में फ्रॉड राशि को तत्काल रिफंड कराने हेतु निर्देशित किया गया था। उक्त निर्देश पर ऑनलाईन ठगी की रोकथाम हेतु इंदौर पुलिस व बैंक द्वारा बेहतर आपसी तालमेल व समन्वय के साथ नई तकनीकों का प्रयोग करते हुए कार्य करके, इन अपराधों पर नियत्रंण पाया जा सके इसी को ध्यान में रखते हुए, इंदौर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के सभी निजी बैंको और फाइनेंस कंपनियों के टास्क फोर्स सदस्य और क्राईम ब्रांच के अधिकारियों के लिये एक कार्यशाला आयोजन आज दिनांक 03 अगस्त 2024 को होटल अमरविलास पर किया गया। जिसमें क्राईम ब्राचं इंदौर के एडिशनल डीसीपी श्री राजेश दंडोतिया की उपस्थिति में शहर के विभिन्न प्रमुख निजी बैंको के नोडल अधिकारीगण एवं क्राईम ब्रांच इन्दौर की टीम उपस्थित रही।

उक्त कार्यशाला में वर्तमान परिदृश्य में बढ़ते ऑनलाईन ट्रान्जेक्शन के कारण, सायबर अपराधियों द्वारा की जाने वाली ऑनलाईन ठगी व धोखाधड़ी की वारदातों की रोकथाम एवं इनसे बचने के लिये ध्यान में रखने वाली आवश्यक बातों पर चर्चा की गयी । जिसमे एडिशनल डीसीपी (क्राईम ब्राचं) राजेश दंडोतिया इन्दौर ने कहा कि पुलिस व बैंक बेहतर आपसी समन्वय व तालमेल के साथ काम करके, इन अपराधों पर बेहतर तरीके से नियंत्रण पाया जा सकता है। साइबर फ्रॉड के मामलों में शिकायत मिलने पर क्राइम ब्रांच द्वारा उन खातों को फ्रीज और होल्ड कराया जाता है जिसमे ठगी का पैसा पीड़ित के खाते से ट्रांसफर किया गया है। ऐसे मामलों में बैंक से अपेक्षा है कि वह इन बैंक खातों की जानकारी जल्द से जल्द उपलब्ध करवाए ताकि पीड़ित को उसका पैसा माननीय न्यायालय के माध्यम से जल्दी मिल सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक समय सीमा बैंक तय करे। साइबर फ्रॉड में अब बड़ी राशि की भी ठगी हो रही है। ऐसे में बैंक की जल्दी की गई कारवाई काफी राहत दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा की जिस बैंक द्वारा इन मामलों में हर माह अच्छा काम किया जाएगा उनके कर्मचारियों को एप्रिशिएशन सर्टिफिकेट भी क्राइम ब्रांच द्वारा दिया जाएगा जिससे उनका प्रोत्साहन बना रहे और पीड़ित की मदद हो सके।

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साइबर फ्रॉड होने पर लोग कई बार शिकायत करने बैंकों के पास भी आ जाते है। ऐसे में जरूरी है कि बैंक कर्मचारी भी शिकायत दर्ज करवाने के लिए उनका मार्गदर्शन करे। पीड़ितों को हेल्प लाइन नंबर 1930 और क्राइम ब्रांच द्वारा जारी साइबर हेल्प लाइन नंबर 7049124445 की जानकारी दे

आयोजित बैठक में प्रमुख तौर पर सभी निजी बैंकों और फाइनेंस कंपनी के 60 से अधिक टास्क फोर्स सदस्य उपस्थित हुए। जिन्होंनें पुलिसकर्मियों तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संवाद के माध्यम से बैंक से संबंधित आने वाली तकनीकी समस्याओं को जाना तथा शीघ्र निराकरण का आशवासन दिया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों के द्वारा सायबर फ्रॉड को रोकनें के लिए बैंको के नोडल अधिकारियों से सायबर अपराधों पर चर्चा कर फीडबेक लिये गये, जिससें भविष्य मे होने वाले सायबर अपराधों को रोकनें मे सफलता प्राप्त की जा सकें।

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